भारत एक ऐसा देश है जो बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत ने पिछले कुछ सालो में बहुत सरी चीज़ो में कामयाभी हासिल की है। आप बहुत सारे लोगो को देख रहे होंगे जो भारत ही नहीं दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनी चला रहे है जैसे सुन्दर पिचाई - गूगल के CEO, सत्य नडेला - माइक्रोसॉफ्ट के CEO, मुकेश अम्बानी - रिलायंस इंडस्ट्री के चैयरमेन और मैनेजिंग डिरेक्टर और भी बहुत सारे भारतीय है जो भारत को दुनिया के आगे रिप्रेजेंट करते है।

UPI आने से पहले भारत में इंटरनेट बैंकिंग और कार्ड बेस ट्रांसक्शन होने के बावजूद भी डिजिटल ट्रांसक्शन न के बराबर होते थे। RBI यानि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के अनुसार भारत में 2011 में केवल 6 ट्रांसक्शन प्रति नागरिक होते थे।

इसके चलते NPCI(National Payment Corporations of India) ने 26 मार्च 2012 में RuPay कार्ड और यूपीआई। 11 अप्रैल 2016 में UPI को लॉन्च किया गया था।

जैसे हमने देखा 11 अप्रैल 2016 में UPI- Unified Payment System को लॉन्च किया गया था। जिसका उपयोग करके सामान्य से सामान्य लोग कही भी और कभी भी एक दूसरे के बैंक में पैसे सरलता से ट्रांसफर कर सकें और डिजिटल ट्रांसक्शन का उपयोग बढे जिससे भ्रस्टाचार काम हो। तब से लेकर आज तक UPI का उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इसकी वजह से भारत दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट मार्किट बन गया है।

अगर हम मई 2022 की बात करें तो UPI के माध्यम से 595 करोड़ ट्रांसक्शन हुए थे, जून 2022 में UPI के माध्यम से 587 करोड़ ट्रांसक्शन हुए थे, और जुलाई 2022 में UPI के माध्यम से 628 करोड़ ट्रांसक्शन हुए थे।

UPI भारत की फाइनेंसियल टेक्नोलॉजी के लिए एक महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी साबित हो सकती है। कुछ रिसर्चर के अनुशार भारत की ये टेक्नोलॉजी भारत को पूरी दुनिया में फाइनेंसियल टेक्नोलॉजी का लीडर बना सकती है।

UPI का भारत में ही नहीं दूसरे बहुत सारे देश में अब उपयोग होने वाला है।  इस लिंक पर क्लिक करके आप हमारा पूरा ब्लॉग हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते है।